मेरी आँखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूँ।
भजन संहिता 119:18
* आंखे चीजो को देखने का काम करती है, यदि हमारी आंखे बन्द हो तो हम चीजो को नहीं देख सकते।
* यहाँ पर परमेश्वर की व्यवस्था अर्थात वचन की अद्धभुत बातों को देखने के लिए आँखों को खोलने की बात कही गयी है।
यहाँ पर यह नहीं कहा गया है कि व्यवस्था (वचन) को देखने के लिए बल्कि अद्धभुत बातों को देखने के लिए।
* जिस तरह से भौतिक संसार में तब तक किसी चीज को देख नहीं सकते जब तक कि हमारी शारीरिक आंखे खुली न हो, उसी तरह वचन की अद्धभुत बातों को देखने के लिए हमारी आँखों का खुलना आवश्यक है, पर कौन सी आँखों का?
क्या हमारी शारीरिक आंखें बन्द हैं, बिलकुल नहीं, बल्कि शारीरिक आँखे लिखी गयी व्यवस्था या वचन को देख पा रही है, पढ़ पा रही है, पर ये शारीरिक आँखे अद्धभुत बातों को नहीं देख पा रही है, क्योंकि यदि ये आंखे वचन की अद्धभुत बातों को देख पाती तो भजनकार आँखों के खुलने की बात न कहता, क्योंकि उसकी शारीरिक आंखे तो पहले से खुली हुई थी।
इसका मतलब वह वचन की अद्धभुत बातों को देखने के लिए एक दूसरी आंख के खुलने की बात कह रहा है और यह आंख आत्मिक आंख है।
* क्यों केवल आत्मिक आँखों के द्वारा ही हम वचन की अद्धभुत बातों को देख सकते हैं? क्योंकि वचन स्वयं आत्मा है (यूहन्ना 6:63) और आत्मिक चीजो को देखने अर्थात जानने और समझने के लिए आत्मा की आँखों का खुलना जरूरी है।
* अब सवाल यह उठता है कि व्यवस्था की अद्धभुत बाते है क्या? वचन के भीतर छिपे हुए रहस्य।
इसलिए भजनकार कह रहा है कि उसकी आत्मिक आँखे खुल जाए, ताकि वह वचन के भीतर छिपे हुए रहस्यों को जान और समझ सके।
* अब सवाल यह है कि वचन की अद्धभुत बातों को देखने के लिए हमारी आंखे खुले कैसे?
जब हम वचन पर मनन करते हैं तो हमारी आंखे खुलती जाती है।
आपको मालूम होगा कि परमेश्वर का वचन दीपक है (भजन संहिता 119:105) और दीपक में प्रकाश होता है, यानि वचन में प्रकाश है, और जब हम वचन पर मनन करते हैं तो हमारी आंखे खुल जाती है और यह प्रकाश हमारी खुली हुई आँखों पर चमकता है, जिससे हम उस वचन के भीतर छिपे हुए रहस्यों और भेदों को देख और जान और समझ पाते हैं।
उदाहरण के लिए, जब आप एक अँधेरे कमरे में जाते हैं, और वहाँ बल्ब जला देते हैं तो बल्ब का प्रकाश आपकी आँखों पर चमक जाता है और आप उस कमरे की सभी चीजों को देखने में सक्षम हो जाते हैं।
जरा सोचिए, जब एक व्यक्ति अँधेरे कमरे में जाएं और उसकी आंखें बंद (अँधा) हो तो यदि वह कमरे का बल्ब जलाएगा भी तौभी उसे कमरे की कोई भी चीज दिखायी नहीं देगी।
और यदि उसकी आंखे खुली हो और वह कमरे में जाए और बल्व न जलाए तौभी उसे कमरे की चीजें दिखाई नहीं देगी।
इसी तरह जब आप वचन पर मनन नहीं करते तो वचन का प्रकाश आपकी आँखों पर नहीं पड़ेगा और अद्धभुत बातों को आप देख नहीं पाओगे।