तब लूत ने आँख उठाकर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की वाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी। सो लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गये।
उत्पत्ति 13:10-11
● बाइबल बताती है कि जब अब्राहम और उसके भतीजे लूत के चरवाहों के मध्य झगड़ा हुआ तो इसके निपटारे के लिए अब्राहम ने लूत से अलग हो जाने की बात कही और उसने लूत के सामने चुनाव रखा और लूत ने एक हरी तराई चुन ली, जो सदोम के निकट थी, जो एक दुष्ट नगर था।
● चुनाव एक प्रकार का निर्णय है, जिसका प्रभाव आने वाले समय पर दिखाई देता है।
● लूत ने हरी तराई को तो चुना किन्तु इस चुनाव का प्रभाव भविष्य में दिखाई पड़ा।
● लूत का चुनाव परमेश्वर के अनुसार नहीं वल्कि उसकी शारीरिक आँखों की इच्छा के अनुसार थी, जिसका परिणाम यह निकला कि एक दुष्ट नगर में चला गया, जिसे परमेश्वर ने नाश किया, लूत की पत्नी नमक का खम्भा बन गयी, उसकी बेटियों ने उसे नशे में धुत करके उसके द्वारा जातियों को पैदा किया, जिनसे परमेश्वर घृणा करता था।
लूत के एक गलत चुनाव ने उसके पूरे वंश को प्रभावित किया।
● इसके विपरीत अब्राहम ने एक बंजर भूमि को चुना , जिसमे परमेश्वर की इच्छा शामिल थी और परमेश्वर ने उसे आशीषित किया और वह भूमि सदा के लिए उसके वंश को दे दी।
● जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक अभिलाषा से प्रेरित होकर किसी गलत वस्तु आदि का चुनाव करता है, तो वह उसके साथ जुडे गलत परिणाम का चुनाव कर लेता है।
जिस प्रकार से लूत ने अपनी शारीरिक आँखों से प्रेरित होकर तराई को चुना पर साथ में उसने उससे जुड़े दुखद परिणाम को भी चुना।
● हमारा आज का चुनाव हमारे आने वाले भविष्य को प्रभावित कर सकता है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि जो हम आज चुन रहे हैं क्या उसमें परमेश्वर की इच्छा शामिल है कि नहीं?
◆ एक सवाल में आप सभी से पूछना चाहता हूं कि क्या कारण था कि अब्राहम ने लूत के समान उस हरी तराई को नहीं चुना?